रामानुज कहेँ रामु कहँ अस कहि छांडेसि प्रान ।
नवाबगंज । शेषावतार लक्ष्मण नेअपने शस्त्रों के प्रहार से इन्द्रजीत मेघनाथ का वध किया तो उसने –
रामानुज कहँ रामु कहँ कहते हुए प्राण त्याग दिए और उसकी भुजा व सर लंका लंका में जाकर गिरे । उसके अगो को गिरा देख लंका में शोक की लहर दौड़ गई तो पत्नी सुलोचना विलाप करने लगी । सुलोचना के विलाप पर पति की कटी पड़ी भुजा चमत्कारिक रूप से फड़क उठी और धरती पर प्रभु राम की शरण में जाने की बात लिख दी । जिस पर पतिव्रता सुलोचना ने भगवान राम के पास पहुंच पति के मोक्ष की कामना की। वहीं पति की भुजा द्वारा लिखी गई बात को सच साबित करने के लिए पति के सर को सम्बोधित करते हुए कहा –
शिर सों कहति सुलोचना हँसहु वेगि मम नाथ, नातर सत्य न मानिहै लिखा जो तुम्हरे हाथ ॥ और रणभूमि में पड़ा इन्द्रजीत का चेहरे पर चमत्कारिक रूप से मुस्कराहट आ गई । जिसे श्रीराम ने पतिव्रता की पति भक्ति का फल बताते हुए सभी की जिज्ञासा को शान्त कर मेघनाथ को अपने लोक में भेज दिया ।
नगर की रामलीला में आज मेघनाथ वध की लोमहर्षक लीला की गई । मेघताथ के वध के बाद भारी आतिशबाजी के साथ उसका विशालकाय पुतला फूंका गया । कल बुधवार को कुम्भ निशुम्भ वध , मेघनाथ शोक व सुलोचना के सती होने की लीला होगी ।