Pushkaralu 2023: पुष्करालु पर्व का हिंदू श्रद्धालुओं में खासा महत्व है। इस दिन को हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाले गंगा पुष्करम के रूप में भी जाना जाता है। यह त्योहार 12 दिनों तक मनाया जाता है और लोग इस त्योहार के दौरान गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष 2023 में गंगा पुष्करम उत्सव 22 अप्रैल से शुरू हो चुका है और इसका समापन 3 मई को होगा।
पुष्करालु 2023: दिनांक
- गंगा पुष्करम प्रारंभ – 22 अप्रैल 2023
- गंगा पुष्करम समाप्त – 3 मई, 2023
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पुष्करालु 2023: महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर नदी एक राशि से जुड़ी होती है और पुष्करालु का पर्व बृहस्पति के एक राशि से दूसरी राशि में जाने पर शुरू होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि पुष्कर एक ऋषि हैं जो जल तत्व सिद्धि को जानते हैं और जिन्हें तीर्थपालक (पवित्र जल के शासक) के रूप में जाना जाता है।
पहले 12 दिन जब बृहस्पति किसी विशेष नदी की राशि में प्रवेश करता है, उसे आदि पुष्करालु के रूप में जाना जाता है और अंतिम 12 दिनों में जब बृहस्पति एक राशि से बाहर निकलता है, उसे अंत्य पुष्करालु माना जाता है।
पुष्करालु को सबसे पवित्र अवधियों में से एक माना जाता है जब भक्त पवित्र डुबकी लगाने के लिए विभिन्न पवित्र नदियों में जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त गंगा नदी (Ganga River) और अन्य पवित्र नदियों में पवित्र डुबकी लगाते हैं, वे पूर्व में किए गए पापों से मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।
पुष्करालु 2023: घूमने की जगहें
- हरिद्वार
- वाराणसी
- ऋषिकेश
- गंगोत्री
- गंगा सागर
पुष्करालु 2023: नदियाँ
भारत में बहने वाली बारह सबसे महत्वपूर्ण नदी –
गंगा, नर्मदा, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, भीमा, पुष्कर, तुंगभद्रा, सिंधी और प्राणहिता
पुष्करालु 2023: अनुष्ठान
- लोग पवित्र डुबकी लगाने के लिए विभिन्न पवित्र स्थानों पर जाते हैं।
- पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार आते हैं।
- यह अवधि पितृ पूजा करने के लिए शुभ मानी जाती है।
- इस दौरान लोग ध्यान करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं।
- भक्त अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने के लिए विभिन्न धार्मिक गतिविधियाँ करते हैं।
- इस पर्व में दान-पुण्य करना पुण्यदायी माना जाता है।